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ऑंटी सेक्स पिक्चर

ऑंटी सेक्स पिक्चर, वो बोले - मेरी जान आज तुम्हाइन इतना मज़ा दूँगा कि तुम भूल नही पायोगी अपनी ये चुदाई ओर वो पूरी तेज़ी से गान्ड मारने लगे मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था. मुझे गुडिया की गाँड देखने से ज़्यादा इस बात में मज़ा आ रहा था कि मेरे साथ एक जवान लडका भी वो नज़ारा देख के ठरक रहा था! देखते देखते मैने शफ़ात की कमर में हाथ डाल दिया और हम अगल बगल कमर से कमर, जाँघ से जाँघ चिपका के खडे थे!

ये खेल पूरी रात चलता रहा. मेने भी अपनी कमर पर नकली लंड बाँध रश्मि की गांद की धुनाई की और अनीत और रीता उसकी चूत को साथ चूसी. ना जाने कब तक कर हम चारों सो गये. कुछ देर बाद प्रिया ने कहा- भाई, चलो अब कपड़े पहन लेते हैं नहीं तो मुझे आपके आगोश में पड़े हुए बहुत जल्द ही नींद आ जायेगी।

आआहह मॅर गइईए…हाययए…पपपाआअ… में मरररर गइई….. बहुत दर्द्दद्ड हो रहाा है… प्लीईएसए निकाआअल लो नाआ… यह दर्द मुझहह से सहन नहीए हो रहा है… आआआः… ओह… ऑंटी सेक्स पिक्चर मेरे घर में मै माँ और पिताजी ही थे..मेरी उमर उस समय २५ साल की थी मेरा लंड ७.५ लंबा और २.५ इंच मोटा है..लेकिन मुझे सेक्स का कोई अनुभव नही था..हाँ मूठ मार लेता था..

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  1. बहू की उंगली अभी भी सेठानी की गांद मे ही गढ़ी हुई थी, और बहू उसे छोटे बच्चो की तरह लाल पड़ी गांद मे डाल के अंदर बाहर कर रही थी. कुछ घंटो मे ही बहू और सेठानी मे क्या दोस्ती बन गयी थी …वाह….मानो…जैसे दोनो रंडीखाने मे सादियो से रहती हो.
  2. राधा :- राज अब हम क्या करेंगे, क्या हम भी यूही भूक मरी,ग़रीबी, लाचारी मे मर जाएँगे? क्या हमारा कोई भविश्य नही होगा ? आज दिल्ली सट्टे में क्या आया है
  3. मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर भाभी से क्या कहूँ,आप बहुत सुन्दर हैं और आपका शरीर ऐसा है कि देखने वाला बस देखता ही रह जाए। भैया बहुत भाग्यशाली हैं जो उन्हें आप जैसी पत्नी मिलीं। जब भी काम करते वक़्त उनका आँचल उनकी छाती पर से फिसल कर नीचे गिरता था या वो नीचे झुकती.. मैं उनकी चूची की एक झलक पाने की कोशिश करता था।
  4. ऑंटी सेक्स पिक्चर...बस में बहुत कम लोग थे। कोई सीज़न नहीं था। बस नवी मुंबई में आ गई। जैसे रुकी तो दो बुर्के वाली औरतें बस में चढ़ गई। यहाँ-वहाँ देखने के बाद एक औरत मेरे बाजू में बैठ गई। दूसरा जोड़ा उनसे थोडा विपरीत था, कंचन जहाँ कद मे थोड़ी नाटी थी उसकी चुचियाँ भी प्रिया जितनी बड़ी नही थी. पर दिखने मे वो काफ़ी सुन्दर थी और उसका पति बॉब्बी भी सुन्दर और हॅंडसम था.
  5. उन्होंने जैसे ही पीछे मुड़ कर देखा तो मुझे देख कर सबसे पहले उन्होने मुझे कस कर चांटा जड़ दिया और कहने लगी- क्या कर रहा था यह? तुझसे शर्म नहीं आती अपनी माँ के साथ ऐसा करते हुए? पर मैं तो मानो सब कुछ भूल ही गया था उस समय। मैं उनके उरोजों से चिपट गया और उन्हें चूसने लगा। हाँ हाँ बेटा, तेरे जैसों को खूब जानता हूँ... साले, चिकने को देख कर सपने देख रहा होगा हा हा हा हा... चल आज मेरी ठरक चढी हुई है, चल रूम पर ले चल... तेरी गाँड में लँड डाल दूँ जानेमन... धर्मेन्द्र के सीधे प्रपोज़ल से मैं मस्त तो हो गया!

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शब्बो ने बड़ी बेताबी से लौड़ा अपने भोसड़े में लिया और ऊपर-नीचे होना चालू किया। और शब्बो के वक्ष को भी मसला जा रहा था। इधर मैंने रुक्कू को चाट-चाट कर बेताब कर दिया। अब वो चाहती थी की उसकी चुदाई हो।

फिर हम इधर-उधर की बातें करने लगे। कॉलेज कैंटीन से वो मेरे लिए कुछ खाने को ले कर आई थी। हमने साथ-साथ खाया। फिर थोड़ी देर में मै वंहा से चला आया। चूँकि मेरा दोस्त हॉस्टल मे रहता था तो मैंने ठहरने के लिए होटल ले लिया था। चूत में लण्ड के ढीला होने की वजह से मुझे बहुत कम मज़ा आ रहा था, उनके लण्ड पर मेरी चूत की पकड़ एकदम ढीली पड़ गई थी। इस वजह से वो जल्दी झड़ नहीं रहे थे और मैं भी नहीं झड़ रही थी।

ऑंटी सेक्स पिक्चर,मैं सिर्फ़ हंस दी। मुझे उसके भीगे हुए लण्ड को देखना भा रहा था। पर नजर बचा कर ! कहीं रोहित देख ना ले। पर उसकी नजरें मुझसे अधिक तेज थी, वो ना सिर्फ़ मेरे भावों के उतार-चढ़ाव देख रहा था बल्कि मेरी नजरें भी वो भांप चुका था। इसी कारण उसला लण्ड धीरे धीरे सख्त होता जा रहा था। उसने बात सेक्स की ओर मोड़ दी।

रश्मि ने एक दूसरा नकली लंड निकाला और प्रिया और कंचन से पूछा, तुममे से कौन प्रीति की चूत इस नकली से लंड से चोदना चाहेगा?

तो हम दोनो खड़ी होकर अपनी पॅंटी उतारने लगे, जिसमे राजा ने हमारी मदद भी की. और हमारी पॅंटी को सूंघते हुए कहा- वाह! गुलाबो की खुसभू आ रही है.डॉ भीमराव अंबेडकर का जीवन परिचय

आह... शाबाश... आह... मैने उसके लँड के छेद को ज़बान से सहलाया! उसका सुपाडा फ़ूला हुआ था! मैने उसके सुपाडे के निचले हिस्से को चाटा! वो उसके प्रीकम से नमकीन हो चुका था! मामी भी मस्त चूत खोले पड़ी थी.मैने उनकी चूचियों पर हाथ रख कर उन्हे हिलाया और उठाया और कहा ' मामी यह तुम कैसे पड़ी हो कोई देखेगा तो क्या सोचेगा.'

वो तो इससे भी ज़्यादा बढिया जगह है… आप तो यहाँ ही कमर सहलाने लगे थे… वहाँ तो ना जाने क्या मूड हो जाये आपका…

रूम में राशिद भैया ने चेंज किया! उन्होने जल्दी से एक लुँगी पहन ली... अआह... लुँगी देख कर मुझे उनके बाप के साथ गुरज़े हुये दिन याद आ गये! वो जल्दी से एक रज़ाई में घुस गये!,ऑंटी सेक्स पिक्चर मेरी बात सुन कर उसने मेरे दोनों हाथों को टी शर्ट की बाहें ऊपर करके देखा, फिर मुझे खड़ा करके मेरी टीशर्ट ऊपर करके मेरी पीठ और पेट को देखा, मेरे पैरों को देखा और फिर जब मैंने उसे देखा तो पाया कि उसकी आँखें भरी हुई थी।

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