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తెలుగు కథలు pdf, पेट भरे होने के कारण हम सब ही जल्दी झपकी लेने लगे और शाम होते ही हम नैनीताल की सुन्दर पहाड़ियों में पहुँच गए। पूनम थोड़ा कसमसाई लेकिन जब मैंने उसके लबों पर एक लम्बा और गहरा चुम्बन दिया तो उसने अपने हाथ पैर ढीले छोड़ दिए और मेरी बाँहों में झूल गई।

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मैं भी ख़ुशी से बोला- मैडम जी क्या पता था कि आप हमारी जानकार निकलेगी, अंदर आइये, मैं आपको कम्मो से मिलवाता हूँ। తెలుగు కథలు pdf मेमसाब अगर आप साथ दें तो मैं आज की रात को आपकी ज़िंदगी की एक यादगार रात बना दूँगा… पर आपको मेरा साथ खुलकर देना होगा!

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आखिरी धक्के में जब मेरा छूटने वाला था तो मैंने प्रेमा की चूत को अपने पेट से जोड़ कर लंड की पिचकारी छोड़ दी जो उसकी सारी चूत में फैल गई।

कामवासना की यह पहली अनुभूति बड़ी ही इत्तेजक और आनन्द दायक लगी। फिर सुन्दरी के कहने पर मैंने ऊपर से धक्के मारने शुरु कर दिए और सुन्दरी भी नीचे से खूब ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगी। अब कम्मो मेरे साथ वाली साइड में आ कर लेट गई और मेरे चूतड़ों को हल्के हल्के थपकी देने लगी। मैं समझ गया कि वो चाहती है कि मैं जल्दी करूँ।

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सर्दी के दिन थे.. रात में छत पर कोई नहीं जाता था। मैंने तेज खांसकर चैक किया कि दोस्त सोया है कि नहीं, वह गहरी नींद में था।भोजपुरी बीएफ एचडी

मेरी इस धक्कशाही से वह कब और कितनी बार छूटी, यह मैं नहीं जानता लेकिन अंत में जो मेरा फव्वारा छूटा, वो कम्मो की चूत की पूरी गहराई तक पहुँच गया होगा। तभी छूटकू ने आजकर बताया कि रिश्ते वाले आ गये हैं। मैंने उठते हुए भाभी की जांघों को जोर से पकड़कर भींच दिया, भाभी की आह निकल गई।

बहुत सोचने के बाद मम्मी ने ही यह फैसला किया कि कम्मो को ही मेरे कमरे में सोना पड़ेगा क्यूंकि वही ही सब नौकरानियों में सुलझी हुई और शांत स्वभाव की थी।

सोनल तुरंत उठी और पेन किलर लाकर दी। मैंने पेन किलर ली और कुछ देर ऐसे ही बैठे रहने के बाद भी जब दर्द में आराम नहीं हुआ तो मैं लेटने की कोशिश करने लगा। सोनल ने सहारा देकर मुझे लिटाया। लेटते के कुछ देर बार राहत महसूस हुई। सोनल मेरे पास ही बैठी रही और मेरा हाथ अपनी गोद में लेकर सहलाती रही।,తెలుగు కథలు pdf पिताजी ने तुरंत हमें चुप कराया और बाहर ले आये। आंटी अंदर ही थी। हम एक कॉफी पीने के लिए आ गये। कॉफी बस बहाना था, असली काम तो कुछ प्लान बनाना था। और वहां पर जो प्लान बना, वो सबको पसंद आया।

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